अभिलाषा मल्टीस्पेशियलिटी आई हॉस्पिटल रुड़की में नए लैसिक सेक्शन का उद्घाटन

रुड़की, 5 दिसंबर, :उत्तराखंड के अग्रणी नेत्र चिकित्सा संस्थानों में से एक, अभिलाषा मल्टीस्पेशियलिटी आई हॉस्पिटल रुड़की ने नए लैसिक (चश्मा हटाने के लिए की जाने वाली सर्जरी) सेक्शन के उद्घाटन के साथ अपनी चिकित्सा सेवाओं का विस्तार किया। लैसिक अनुभाग का उद्घाटन एम्स (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) ऋषिकेश के निदेशक और सीईओ डॉक्टर प्रोफेसर रवि कांत ने किया। डॉक्टर प्रोफेसर रवि कांत को भारत सरकार से 2016 में पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है । डॉक्टर रविंदर कपूर, डॉक्टर एस के सिंह, डॉक्टर सुधीर चौधरी, डॉक्टर हरमिंदर सिंह, डॉक्टर प्रदीप रास्तोगी, डॉक्टर अजय भार्गव, डॉक्टर जेएम भटनागर, डॉक्टर कर्ण सिंह, विधायक प्रदीप बत्रा,  अधिवक्ता मुनीश चंद  और इंजीनियर एम.सी.गोयल इस अवसर पर उपस्थित थे।

अभिलाषा मल्टीस्पेशियलिटी आई अस्पताल सबसे तेज़, सुरक्षित और दर्द रहित लैसिक प्रक्रिया प्रदान करता है । यह उपलब्धि हॉस्पिटल द्वारा हासिल की गयी सबसे उन्नत तकनीक से संभव हो सकी है । नाइडक क्वेस्ट, जिसमें 1000 हर्ट्ज की गति है, और पेंटाकैम-ओफ्थल्मिक ऐसे ही नवीनतम उपकरण हैं जो उत्कृष्ट परिणाम देते हैं । इन उपकरणों से पूर्व-लैसिक जांच बहुत बेहतर और सटीक होती है और लैसिक प्रक्रिया केवल 10 मिनट में पूरी हो जाती है । प्रक्रिया के परिणाम बेहतरीन होते हैं । मीडिया को संबोधित करते हुए डॉक्टर रवि कांत ने कहा कि एम्स टर्शियरी स्वास्थ्य देखभाल और अनुसंधान के लिए समर्पित हैं। उन्होंने कहा कि एम्स एमबीबीएस, एमडी एमएस और डीएम एमसीएस जैसे कार्यक्रम प्रदान करता है जो विश्व स्तरीय चिकित्सक तैयार करता है। यह चिकित्सक सर्वोत्तम संभव प्राथमिक और माध्यमिक स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित करते हैं। 

क्षमता में यह वृद्धि अभिलाषा मल्टीस्पेशियलिटी आई अस्पताल को हरिद्वार, मुजफ्फर नगर, ऋषिकेश, बिजनौर, सहारनपुर, और काशीपुर क्षेत्र में लैसिक सुविधा प्रदान कराने वाला पहला संस्थान बनाती है । इसके अलावा, संस्थान देहरादून, हरिद्वार, मुजफ्फर नगर, ऋषिकेश, बिजनौर, सहारनपुर, और काशीपुर क्षेत्र में सबसे तेज लैसिक प्रक्रिया प्रदान कराने वाला पहला अस्पताल बन गया है।

इस अवसर पर  अभिलाषा मल्टीस्पेशियलिटी आई अस्पताल में मुख्य सर्जन डॉक्टर सीएस ग्रोवर (डीओ, एमएस) ने कहा, “हमारा लक्ष्य सस्ती कीमतों पर समाज के सभी वर्गों को विश्व स्तरीय उपचार प्रदान करना है। दवा और शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं के क्षेत्र में भारत में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है लेकिन ऐसी प्रगति बहुत ऊंची कीमतों के कारण मेट्रोपॉलिटन शहरों तक ही सीमित है। हमने ऊंची कीमत के बावजूद हमेशा अपने मरीजों की सेवा के लिए नवीनतम तकनीक हासिल की है और यह सुनिश्चित किया है कि कीमतों का बोझ कभी भी मरीजों  पर न लादा जाए। अभिलाषा मल्टीस्पेशियलिटी आई अस्पताल प्रगतिशील दृष्टिकोण रखता है। उदाहरण के लिए, 1988 में (तब) उत्तर प्रदेश में कम्प्यूटरीकृत आंख परीक्षण (ऑटोरेफ्रैक्ट्रोमीटर) तकनीक लाने वाला हमारा पहला  संस्थान था। मोतियाबिंद के उपचार के लिए हम फिर से राज्य में पहली बार फैकोइमल्सीफिकेशन तकनीक लाये।  भविष्य में हम रोबोटिक आंख शल्य चिकित्सा तकनीक हासिल करने की योजना बना रहे हैं। यह तकनीक यूएसए जैसे देशों में प्रयोगात्मक चरण में है, और निश्चित रूप से नेत्र चिकित्सा का भविष्य है “।

डॉक्टर राहुल शर्मा (एमएस, डीएनबी), हेड (विट्रेओ-रेटिना) ने संस्थान के मूल्यों पर जोर दिया और कहा, “हम अभिलाषा में केवल अपना आर्थिक लाभ बढ़ाने हेतु रोगियों को शल्य चिकित्सा कराने के लिए नहीं कहते हैं। वास्तव में हम सर्जरी का सुझाव केवल तभी देते हैं जब यह बिल्कुल जरूरी होती है और रोगी निश्चित रूप से सर्जरी योग्य होता है “।

डॉक्टर आशिमा ग्रोवर (एमएस, डीएनबी), हेड (कॉर्निया और रिफ्रैक्टिव सर्जरी) ने अभिलाषा की बेहतर तकनीकी क्षमता और चिकित्सा ज्ञान और विशेषज्ञता को रेखांकित किया: “यह उत्तराखंड में पहली बार है कि एक कॉर्निया विशेषज्ञ द्वारा लैसिक  सर्जरी की जाएगी । ऐसे विशेषज्ञ कॉर्नियल ऊतक की बेहतर सर्जिकल हैंडलिंग और उत्कृष्ट परिणाम देने में अधिक सक्षम होते हैं । उन्होंने लैसिक  प्रक्रिया की श्रेष्ठता पर बल देते हुए कहा, “हम यथासंभव पतली लैसिक फ्लैप बनाने के लिए एक विशेष एसबीके माइक्रोकेराटॉम का उपयोग करते हैं जिसके सटीक और बेहतर दीर्घकालिक परिणाम होते हैं।” उन्होंने आगे बताया कि अस्पताल 2019 में कॉर्नियल प्रत्यारोपण सर्जरी शुरू करेगा।

अभिलाषा मल्टीस्पेशियलिटी आई हॉस्पिटल उच्च कोटि की देखभाल, विनम्रता और पेशेवर उत्कृष्टता के साथ मरीजों की सेवा के लिए जाना जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *