अभिनेता प्राण ,राजेन्द्र कुमार और दारा सिंह का निधन हुआ था आज

 देश और दुनिया के इतिहास में 12 जुलाई

Actor Pran

नई दिल्ली, 12 जुलाई! १२ जुलाई ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का १९३वॉ (लीप वर्ष में १९४ वॉ) दिन है। साल में अभी और १७२ दिन बाकी है।देश और दुनिया के इतिहास में 12 जुलाई कई कारणों से महत्वपूर्ण हैं, जिनमें से ये सभी प्रमुख हैं…

100 – ईसा पूर्व: रोमन सम्राट जूलियस सीजर का जन्म।
12 जुलाई 1290- किंग एडवर्ड के आदेश पर यहूदियों को इंग्लैंड से निकाला गया। 

1489 -दिल्ली के सुल्तान बहलोल खान लोदी का निधन।
1674 -शिवाजी ने ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ मित्रता के अनुबंध पर हस्ताक्षर किया।   Image result for शिवाजी ने ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ मित्रता के अनुबंध पर हस्ताक्षर किया

12 जुलाई 1812- जनरल हुल के नेतृत्व में अमेरिकी सेना ने कनाडा पर हमला किया।
12 जुलाई 1918- टोकायाम की खाड़ी में जापानी युद्धपोत में विस्फोट. 500 मरे।
12 जुलाई 1943- प्रोचोरोवका की लड़ाई में रूस ने नाजियों को हराया 12000 मरे।
1823 – देश में निर्मित पहला वाष्प जहाज डायना कलकत्ता (अब कोलकाता) में लांच हुआ।
1912 -‘क्वीन एलिजाबेथ’अमेरिका में प्रदर्शित होने वाली पहली विदेशी फिल्म बनी।
1918 -टोकायाम की खाड़ी में जापानी युद्धपोत में विस्फोट, 500 मरे।
1982 -भारतीय टेबल टेनिस खिलाड़ी अचंत शरत कमल का जन्म।
1990 -रूस के तत्कालीन राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन ने सोवियत कम्युनिस्ट पार्टी से इस्तीफा देने की घोषणा की।
1993 -जापान में 7.8 तीव्रता वाले भूकंप से160 मरे।
1998 -1.7 अरब लोगों ने फ्रांस और ब्राजील के बीच हुए फुटबॉल विश्वकप का फाइनल देखा।
1998 -16वें विश्वकप फ़ुटबाल के फ़ाइनल में फ़्रांस ने ब्राजील को 3-0 से हराया।
1999 -हिन्दी फिल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता राजेंद्र कुमार का निधन।

राजेन्द्र कुमार (२० जुलाई १९२९ – १२ जुलाई १९९९) ६० तथा ७० के दशकों में बॉलीवुड के सफलतम अभिनेताओं में से एक थे। ८० के दशक में वह कई फ़िल्मों के निर्माता थे जिनमें उनके पुत्र कुमार गौरव ने अभिनय किया है। उनका जन्म ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रान्त के सियालकोट शहर में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है।

फिल्मी सफ़र

राजेन्द्र कुमार ने अपने फ़िल्मी सफ़र की शुरुआत १९५० की फ़िल्म जोगन से की जिसमें उनको दिलीप कुमार और नर्गिस के साथ अभिनय करने का अवसर मिला। उनको १९५७ में बनी मदर इंडिया से ख्याति प्राप्त हुयी जिसमें उन्होंने नर्गिस के बेटे की भूमिका अदा की। १९५९ की फ़िल्म गूँज उठी शहनाई की सफलता के बाद उन्होंने बतौर मुख्य अभिनेता नाम कमाया।
६० के दशक में उन्होंने काफ़ी नाम कमाया और कई दफ़ा ऐसा भी हुआ कि उनकी ६-७ फ़िल्में एक साथ सिल्वर जुबली हफ्ते में होती थीं। इसी कारण से उनका नाम ‘जुबली कुमार’ पड़ गया।
अपने फ़िल्मी जीवन में राजेन्द्र कुमार ने कई सफल फ़िल्में दीं जैसे धूल का फूल (१९५९), दिल एक मंदिर (१९६३), मेरे महबूब (१९६३), संगम(१९६४), आरज़ू (१९६५), प्यार का सागर, गहरा दाग़, सूरज (१९६६) और तलाश
उनको सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की श्रेणी में फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार के लिए फ़िल्म दिल एक मंदिर, आई मिलन की बेला और आरज़ू के लिए नामांकित किया गया और सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेता की श्रेणी में संगम के लिए।
१९७२ से उनको राजेश खन्ना से स्पर्धा का सामना करना पड़ा। इसी दौरान नूतन के साथ उन्होंने फ़िल्म साजन बिना सुहागन (१९७८) में काम किया। ७० के दशक के आख़िर से ८० के दशक तक उन्होंने चरित्र भूमिका की ओर रुख़ किया। उन्होंने कई पंजाबी फ़िल्मों में भी काम किया जैसे तेरी मेरी एक जिन्दड़ी
१९८१ में उन्होंने अपने पुत्र कुमार गौरव को फ़िल्मों में लव स्टोरी नामक फ़िल्म से प्रवेश करवाया। इस फ़िल्म के निर्माता-निर्देशक होने के साथ-साथ उन्होंने इस फ़िल्म में कुमार गौरव के पिता की भूमिका भी अदा की। यह फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस में बहुत सफल सिद्ध हुयी।उन्होंने अपने पुत्र को लेकर कई और फ़िल्में भी निर्मित कीं। १९८६ में उन्होंने अपने पुत्र और संजय दत्त को लेकर नाम फ़िल्म बनाई जो फिर से बॉक्स ऑफ़िस में धमाल करने में कामयाब हुयी। उनका आख़िरी अभिनय Earth फ़िल्म में था।Image result for अभिनेता प्राण ,राजेन्द्र कुमार और दारा सिंह

व्यक्तिगत जीवन

उनका विवाह शुक्ला नामक महिला के साथ हुआ और दोनों की तीन संतानें हुयीं-एक पुत्र तथा दो पुत्रियाँ। उनके पुत्र कुमार गौरव का विवाह राज कपूर की पुत्री रीमा के साथ तय हुआ था लेकिन किसी कारणवश वह रिश्ता टूट गया। इसके पश्चात् उसका विवाह सुनील दत्त और नर्गिस की पुत्री नम्रता- जो कि संजय दत्त की बहन हैं- के साथ संपन्न हुआ।
निजी जीवन में राजेन्द्र कुमार तथा राज कपूर बहुत घनिष्ठ मित्र थे लेकिन उनकी संतानों के रिश्ते टूट जाने से उनके रिश्ते में भी खटास आ गई। वह सुनील दत्त के भी काफ़ी क़रीबी मित्र थे और सुनील दत्त के अनुसार जब वह अपने पुत्र संजय दत्त के संकट से जूझ रहे थे तो राजेन्द्र कुमार ने उनकी बहुत मदद की।
अपने ७०वें जन्मदिन से सिर्फ़ ८ दिन पहले १२ जुलाई १९९९ को कैन्सर की बीमारी के चलते उनका देहवसान हो गया।

प्रमुख फिल्में

वर्ष फ़िल्म चरित्र टिप्पणी
1968 साथी रवि
1964 संगम

पुरस्कार

  • पद्मश्री १९६९
  • पं॰ जवाहर लाल नेहरू द्वारा एकसाथ फ़िल्म ‘क़ानून’ (हिन्दी) तथा ‘मेंहदी रंग लाग्यो’ (गुजराती) के लिए राष्ट्रीय सम्मान से पुरस्कृत
  • उनको विशेष रूप से शास्त्री राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाज़ा गया था और वह कई धर्मार्थ संगठनों से जुड़े थे।

2001 – भारत और बंगलादेश अगरतला और ढाका के बीच’मैत्री’बस सेवा प्रारम्भ।
2003 – उत्तर और दक्षिण कोरिया परमाणु हथियार मुद्दे पर बातचीत के लिए सहमत।
2005 – मशहूर क्रिकेट अंपायर डेविड शेफर्ड़ ने सन्न्यास लिया।
2006 – इह्मायल ने अपने दो सैनिकों के बंधक बनाये जाने के बाद लेबनान पर हमला किया।
2012 -विश्व प्रसिद्ध पहलवान और हिन्दी फिल्मों के अभिनेता दारा सिंह का निधन।

पहलवान अभिनेता दारा सिंह
Dara Singh 1.jpg
जन्म सोमवार19 नवम्बर1928 धरमूचक पंजाब
मृत्यु गुरुवार12 जुलाई2012 मुम्बई (83 वर्ष)
व्यवसाय पहलवानअभिनेतासांसदलेखकनिर्देशक
बच्चे विंदु दारा सिंह,प्रदुमन रंधावा,अमरीक सिंह रंधावा

दारा सिंह (पूरा नाम: दारा सिंह रन्धावा, अंग्रेजी: Dara Singh, जन्म: 19 नवम्बर, 1928 पंजाबमृत्यु: 12 जुलाई 2012 मुम्बई) अपने जमाने के विश्व प्रसिद्ध फ्रीस्टाइल पहलवान रहे हैं। उन्होंने 1959 में पूर्व विश्व चैम्पियन जार्ज गारडियान्का को पराजित करके कामनवेल्थ की विश्व चैम्पियनशिप जीती थी। 1968 में वे अमरीका के विश्व चैम्पियन लाऊ थेज को पराजित कर फ्रीस्टाइल कुश्ती के विश्व चैम्पियन बन गये। उन्होंने पचपन वर्ष की आयु तक पहलवानी की और पाँच सौ मुकाबलों में किसी एक में भी पराजय का मुँह नहीं देखा। 1983 में उन्होंने अपने जीवन का अन्तिम मुकाबला जीतने के पश्चात कुश्ती से सम्मानपूर्वक संन्यास ले लिया।Image result for अभिनेता प्राण ,राजेन्द्र कुमार और दारा सिंह

उन्नीस सौ साठ के दशक में पूरे भारत में उनकी फ्री स्टाइल कुश्तियों का बोलबाला रहा। बाद में उन्होंने अपने समय की मशहूर अदाकारा मुमताज के साथ हिन्दी की स्टंट फ़िल्मों में प्रवेश किया। दारा सिंह ने कई फ़िल्मों में अभिनय के अतिरिक्त निर्देशन व लेखन भी किया। उन्हें टी० वी० धारावाहिक रामायण में हनुमान के अभिनय से अपार लोकप्रियता मिली। उन्होंने अपनी आत्मकथा मूलत: पंजाबी में लिखी थी जो 1993 में हिन्दी में भी प्रकाशित हुई। उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने राज्य सभा का सदस्य मनोनीत किया। वे अगस्त 2003 से अगस्त 2009 तक पूरे छ: वर्ष राज्य सभा के सांसद रहे।

7 जुलाई 2012 को दिल का दौरा पड़ने के बाद उन्हें कोकिलाबेन धीरूभाई अम्बानी अस्पताल मुम्बई में भर्ती कराया गया किन्तु पाँच दिनों तक कोई लाभ न होता देख उन्हें उनके मुम्बई स्थित निवास पर वापस ले आया गया जहाँ उन्होंने 12 जुलाई 2012 को सुबह साढ़े सात बजे दम तोड़ दिया।

व्यक्तिगत जीवन

दारा सिंह रन्धावा का जन्म 19 नवम्बर 1928 को अमृतसर (पंजाब) के गाँव धरमूचक में श्रीमती बलवन्त कौर और श्री सूरत सिंह रन्धावा के यहाँ हुआ था। कम आयु में ही घर वालों ने उनकी मर्जी के बिना उनसे आयु में बहुत बड़ी लड़की से शादी कर दी। माँ ने इस उद्देश्य से कि पट्ठा जल्दी जवान हो जाये उसे सौ बादाम की गिरियों को खाँड और मक्खन में कूटकर खिलाना व ऊपर से भैंस का दूध पिलाना शुरू कर दिया। नतीजा यह हुआ कि सत्रह साल की नाबालिग उम्र में ही दारा सिंह प्रद्युम्न रंधावा नामक बेटे के बाप बन गये।[3] दारा सिंह का एक छोटा भाई सरदारा सिंह भी था जिसे लोग रंधावा के नाम से ही जानते थे। दारा सिंह और रंधावा – दोनों ने मिलकर पहलवानी करनी शुरू कर दी और धीरे-धीरे गाँव के दंगलों से लेकर शहरों तक में ताबड़तोड़ कुश्तियाँ जीतकर अपने गाँव का नाम रोशन किया।

अखाड़े का विजय रथ

1947 में दारा सिंह सिंगापुर आ गये। वहाँ रहते हुए उन्होंने भारतीय स्टाइल की कुश्ती में मलेशियाई चैम्पियन तरलोक सिंह को पराजित कर कुआला लंपुर में मलेशियाई कुश्ती चैम्पियनशिप जीती। उसके बाद उनका विजय रथ अन्य देशों की चल पड़ा और एक पेशेवर पहलवान के रूप में सभी देशों में अपनी धाक जमाकर वे 1952 में अपने वतन भारत लौट आये। भारत आकर 1954 में वे भारतीय कुश्ती चैम्पियन बने।

दारा सिंह जापान रेस्लिंग एसोसिएशन 1955 में किंग काँग पर मुक्के बरसाते हुए

इसके बाद उन्होंने कामनवेल्थ देशों का दौरा किया और ओरिएंटल चैम्पियन किंग काँग को भी परास्त कर दिया। किंग कांग के बारे मे ये भी कहा जाता है की दारा सिंह ने किंगकांग के मुछ के बाल उखाड़ दिए थे। बाद में उन्हें कनाडा और न्यूजीलैण्ड के पहलवानों से खुली चुनौती मिली। अन्ततः उन्होंने.कलकत्ता में हुई कामनवेल्थ कुश्ती चैम्पियनशिप में कनाडा के चैम्पियन जार्ज गारडियान्का एवं न्यूजीलैण्ड के जान डिसिल्वा को धूल चटाकर यह चैम्पियनशिप भी अपने नाम कर ली। यह 1959.की घटना है।

दारा सिंह ने उन सभी देशों का एक-एक करके दौरा किया जहाँ फ्रीस्टाइल कुश्तियाँ लड़ी जाती थीं। आखिरकार अमरीका के विश्व चैम्पियन लाऊ थेज को 29 मई 1968 को पराजित कर वे फ्रीस्टाइल कुश्ती के विश्व चैम्पियन बन गये। उन्होंने पचपन वर्ष तक पहलवानी की और पाँच सौ मुकाबलों में किसी एक में भी पराजय का मुँह नहीं देखा। 1983 में उन्होंने अपने जीवन का अन्तिम मुकाबला जीता और भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के हाथों अपराजेय पहलवान का खिताब अपने पास बरकरार रखते हुए कुश्ती से सम्मानपूर्वक संन्यास ले लिया।

व्यक्तिगत जीवन

जिन दिनों दारा सिंह पहलवानी के क्षेत्र में अपार लोकप्रियता प्राप्त कर चुके थे उन्हीं दिनों उन्होंने अपनी पसन्द से दूसरा और असली विवाह सुरजीत कौर नाम की एक एम०ए० पास लड़की से किया। उनकी दूसरी पत्नी सुरजीत कौर से तीन बेटियाँ और दो बेटे हैं। पहली वाली बीबी से पैदा उनका एकमात्र पुत्र प्रद्युम्न रंधावा अब मेरठ में रहता है जबकि दूसरी से पैदा विन्दु दारासिंह मुंबई में।Image result for अभिनेता प्राण ,राजेन्द्र कुमार और दारा सिंह

2012 में पहली व अन्तिम बीमारी के बाद निधन

पहलवान दारा सिंह के शव के अन्तिम दर्शन

7 जुलाई 2012 को दिल का दौरा पड़ने के बाद उन्हें कोकिलाबेन धीरूभाई अम्बानी अस्पताल मुम्बई में भर्ती कराया गया किन्तु सघन चिकित्सा के बावजूद कोई लाभ न होता देख चिकित्सकों ने जब हाथ खड़े कर दिये तब उन्हें उनके परिवार जनों के आग्रह पर 11 जुलाई 2012 को देर रात गये अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी और उनके मुम्बई स्थित “दारा विला” निवास पर लाया गया जहाँ उन्होंने 12 जुलाई 2012 को सुबह साढ़े सात बजे दम तोड़ दिया। जैसे ही यह समाचार प्रसारित हुआ कि “पूर्व कुश्ती चैम्पियन पहलवान अभिनेता दारा सिंह नहीं रहे” और “कभी किसी से हार न मानने वाला अपने समय का विश्वविजेता पहलवान आखिरकार चौरासी वर्ष की आयु में अपने जीवन की जंग हार गया।” तो उनके प्रशंसकों व शुभचिन्तकों की अपार भीड़ उनके बँगले पर जमा हो गयी। उनका अन्तिम संस्कार जुहू स्थित श्मशान घर में कर दिया गया।

प्रमुख फिल्में

यूँ तो दारा सिंह ने पचपन वर्ष के फ़िल्मी कैरियर में कुल मिलाकर एक सौ दस से अधिक फ़िल्मों में बतौर अभिनेता, लेखक एवं निर्देशक के रूप में काम किया किन्तु उनकी कुछ उल्लेखनीय फ़िल्मों का विवरण इस प्रकार है:

बतौर अभिनेता

वर्ष फ़िल्म चरित्र
2012 अता पता लापता अतिथि
2007 जब वी मैट दादा जी
2006 दिल अपना पंजाबी हरदम सिंह
2006 क्या होगा निम्मो का अमरदीप सहगल (दादाजी)
2004 पारिवारिक व्यवसाय
2003 सीमा हिन्दुस्तान की जालिम सिंह
2003 कल हो न हो चढा चाचा
2002 शरारत श्री गुजराल
2001 फ़र्ज़ तायाजी
2000 दुल्हन हम ले जायेंगे
1999 दुर नही ननकाना बख्तावर सिंह
1999 ज़ुल्मी बाबा ठाकुर
1999 दिल्लगी वीर सिंह
1998 ऑटो चालक
1998 गुरू गोबिंद सिंह
1997 लव कुश हनुमान
1995 राम शस्त्र पुलिस कमिश्नर
1994 करन
1993 अनमोल दादा शमसेर
1993 बैचेन
1992 प्रेम दीवाने लोहा लिंह
1991 मौत की सजा प्यारा सिंह
1991 धर्म संकट दारा
1991 अज़ूबा महाराजा कर्ण सिंह
1990 प्रतिग्या दिलावर सिंह
1990 नाकाबंदी धरम सिंह
1989 घराना विजय सिंह पहलवान
1988 पाँच फौलादी उस्ताद जी
1988 महावीरा दिलेर सिंह
1986 कृष्णा-कृष्णा बलराम
1986 कर्मा धर्म
1985 मर्द राजा आज़ाद सिंह
1981 खेल मुकद्दर का
1978 भक्ति में शक्ति दयानु
1978 नालायक पहलवान
1976 जय बजरंग बली हनुमानजी
1975 वारण्ट प्यारा सिंह
1975 धरम करम भीम सिंह
1974 दुख भंजन तेरा नाम डाकू दौले सिंह
1974 कुँवारा बाप
1973 मेरा दोस्त मेरा धर्म
1970 मेरा नाम जोकर रिंग मास्टर
1970 आनन्द पहलवान
1965 सिकन्दर-ए-आज़म सिकन्दर
1965 लुटेरा
1962 किंग कौंग जिंगु/किंग कॉग
1955 पहली झलक पहलवान दारा सिंह
1952 संगदिल

बतौर लेखक

वर्ष फ़िल्म टिप्पणी
1978 भक्ति में शक्ति

बतौर निर्देशक

वर्ष फ़िल्म टिप्पणी
1978 भक्ति में शक्ति
1973 मेरा दोस्त मेरा धर्म


2013 -हिन्दी फिल्मों के जाने माने नायक, खलनायक और चरित्र अभिनेता प्राण का निधन।

प्राण (जन्म: 12 फ़रवरी 1920; मृत्यु: 12 जुलाई 2013) हिन्दी फ़िल्मों के एक प्रमुख चरित्र अभिनेता थे जो मुख्यतः अपनी खलनायक की भूमिका के लिये जाने जाते हैं। कई बार फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार तथा बंगाली फ़िल्म जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन अवार्ड्स जीतने वाले इस भारतीय अभिनेता ने हिन्दी सिनेमा में 1940 से 1990 के दशक तक दमदार खलनायक और नायक का अभिनय किया। उन्होंने प्रारम्भ में 1940 से 1947 तक नायक के रूप में फ़िल्मों में अभिनय किया। इसके अलावा खलनायक की भूमिका में अभिनय 1942 से 1991 तक जारी रखा। उन्होंने 1948 से 2007 तक सहायक अभिनेता की तर्ज पर भी काम किया।

अपने उर्वर अभिनय काल के दौरान उन्होंने 350 से अधिक फ़िल्मों में काम किया। उन्होंने खानदान (1942), पिलपिली साहेब (1954) और हलाकू (1956) जैसी फ़िल्मों में मुख्य अभिनेता की भूमिका निभायी। उनका सर्वश्रेष्ठ अभिनय मधुमती (1958), जिस देश में गंगा बहती है(1960), उपकार (1967), शहीद (1965), आँसू बन गये फूल (1969), जॉनी मेरा नाम (1970), विक्टोरिया नम्बर २०३ (1972), बे-ईमान(1972), ज़ंजीर (1973), डॉन (1978) और दुनिया (1984) फ़िल्मों में माना जाता है।

प्राण ने अपने कैरियर के दौरान विभिन्न पुरस्कार और सम्मान अपने नाम किये। उन्होंने 1967, 1969 और 1972 में फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता पुरस्कार और 1997 में फ़िल्मफेयर लाइफटाइम एचीवमेंट अवार्ड जीता। उन्हें सन् 2000 में स्टारडस्ट द्वारा ‘मिलेनियम के खलनायक’ द्वारा पुरस्कृत किया गया।2001 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया और भारतीय सिनेमा में योगदान के लिये 2013 में दादा साहब फाल्के सम्मान से नवाजा गया।2010 में सीएनएन की सर्वश्रेष्ठ 25 सर्वकालिक एशियाई अभिनेताओं में चुना गया।

व्यक्तिगत जीवनImage result for अभिनेता प्राण ,राजेन्द्र कुमार और दारा सिंह

12 फ़रवरी 1920 को दिल्ली में पैदा हुये प्राण ने सैकड़ों फ़िल्मों में यादगार भूमिकाएँ निभाईं। प्राण के पिता लाला केवल कृष्ण सिकन्द एक सरकारी ठेकेदार थे, जो आम तौर पर सड़क और पुल का निर्माण करते थे। देहरादून के पास कलसी पुल उनका ही बनाया हुआ है। अपने काम के सिलसिले में इधर-उधर रहने वाले लाला केवल कृष्ण सिकन्द के बेटे प्राण की शिक्षा कपूरथलाउन्नावमेरठ, देहरादून और रामपुर में हुई।

बतौर फोटोग्राफर लाहौर में अपना कैरियर शुरु करने वाले प्राण को 1940 में ‘यमला जट’ नामक फ़िल्म में पहली बार काम करने का अवसर मिला। उसके बाद तो प्राण ने फिर पलट कर नहीं देखा।

रविवार के अनुसार उन्होंने लगभग 400 फ़िल्मों में काम किया। एक तरफ उनके नाम ‘राम और श्याम’ के खलनायक की ऐसी तस्वीर रही है, जिससे लोगों ने परदे के बाहर भी घृणा शुरु कर दी थी, वहीं उनके नाम ‘उपकार’ के मंगल चाचा की भूमिका भी है, जिसे दर्शकों का बेइन्तहा प्यार और सम्मान मिला। 1968 में उपकार, 1970 आँसू बन गये फूल और 1973 में प्राण को बेईमान फ़िल्म में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के लिये फ़िल्म फेयर अवार्ड दिया गया। इसके बाद मिले सम्मान और अवार्ड की संख्या सैकड़ों में है।

1945 में शुक्ला से विवाहित प्राण भारत-पाकिस्तान बँटवारे के बाद बेटे अरविन्द, सुनील और एक बेटी पिंकी के साथ मुम्बई आ गये। आज की तारीख में उनके परिवार में 5 पोते-पोतियाँ और 2 पड़पोते भी शामिल हैं। खेलों के प्रति प्राण का प्रेम भी जगजाहिर है। 50 के दशक में उनकी अपनी फुटबॉल टीम ‘डायनॉमोस फुटबाल क्लब’ बहुचर्चित रहा है।.

इस महान कलाकार ने 12 जुलाई 2013 को मुम्बई के लीलावती अस्पताल में अन्तिम साँस ली। उल्लेखनीय बात यह भी है कि उनके जन्म और मृत्यु की तिथि की संख्या एक ही थी- 12 (बारह)।

प्रमुख फिल्में

वर्ष फ़िल्म चरित्र टिप्पणी
2002 तुम जियो हज़ार साल
1999 जय हिन्द
1998 बदमाश
1997 गुड़िया हमीद
1997 सलमा पे दिल गया है
1997 लव कुश
1996 तेरे मेरे सपने
1995 साजन की बाहों में
1994 भाग्यवान धनराज
1994 हम हैं बेमिसाल डिसूज़ा
1993 1942: अ लव स्टोरी
1993 गुरुदेव
1993 चन्द्रमुखी
1993 आजा मेरी जान
1992 इसी का नाम ज़िन्दगी
1992 इन्तेहा प्यार की महेन्द्र प्रताप ओबेरॉय
1992 माशूक
1991 सनम बेवफ़ा
1991 बंजारन ठाकुर बाबा
1991 लक्ष्मण रेखा किशन लालबहादुर शर्मा
1990 रोटी की कीमत
1990 आज़ाद देश के गुलाम अशोक भंडारी
1989 तूफान
1989 जादूगर
1989 दाता
1988 पाप की दुनिया जेलर
1988 गुनाहों का फ़ैसला
1988 मोहब्बत के दुश्मन
1988 शेरनी
1988 धर्मयुद्ध
1988 कसम मंगल सिंह
1988 औरत तेरी यही कहानी
1987 गोरा
1987 हिफ़ाज़त
1987 कुदरत का कानून
1987 ईमानदार
1987 मुकद्दर का फैसला धनराज
1986 धर्म अधिकारी
1986 लव एंड गॉड
1986 जीवा लाला
1986 बेटी रामू
1986 सिंहासन
1986 दिलवाला
1985 पाताल भैरवी
1985 कर्मयुद्ध चरन सिंह द्योल
1985 माँ कसम
1985 बेवफ़ाई
1985 युद्ध
1985 होशियार
1985 सरफ़रोश बाबा
1984 हसीयत जगदीश
1984 राज तिलक अर्जुन सिंह
1984 सोनी महिवाल
1984 लैला भरत सिंह
1984 फ़रिश्ता ख़ान चाचा
1984 इंसाफ कौन करेगा
1984 दुनिया
1984 राजा और राना
1984 मेरा फैसला कमिश्नर राना
1984 जागीर मंगल सिंह
1984 शराबी
1983 फ़िल्म ही फ़िल्म
1983 नास्तिक बलबीर
1983 वो जो हसीना
1983 अंधा कानून
1983 दौलत के दुश्मन
1983 सौतन
1983 नौकर बीवी का अब्दुल
1982 ताकत
1982 तकदीर का बादशाह
1982 जानवर
1982 जीओ और जीने दो
1981 खुदा कसम सेठ गिरधारी लालबहादुर
1981 क्रोधी
1981 कालिया
1981 लेडीज़ टेलर सलीम बेग़
1981 खून का रिश्ता
1981 मान गये उस्ताद चंदन सिंह
1981 नसीब नामदेव
1981 वक्त की दीवार
1980 ज़ालिम
1980 जल महल
1980 बॉम्बे 405 मील
1980 कर्ज़
1980 धन दौलत
1980 आप के दीवाने
1980 ज्वालामुखी राय
1980 दोस्ताना टोनी
1978 डॉन
1978 काला आदमी
1978 खून की पुकार
1978 अपना कानून इंस्पेक्टर वर्मा
1978 दो मुसाफ़िर
1978 विश्वनाथ
वर्ष फ़िल्म चरित्र टिप्पणी
1978 गंगा की सौगन्ध
1978 चोर हो तो ऐसा प्राण राजेन्द्रनाथ
1978 देश परदेस समीर साहनी
1977 चक्कर पे चक्कर
1977 चाँदी सोना अमर
1977 धर्मवीर
1977 हत्यारा
1977 अमर अकबर एन्थोनी किशन लाल
1976 दस नम्बरी
1976 शंकर दादा
1975 वारंट
1975 चोरी मेरा काम
1975 दो झूठ
1975 सन्यासी
1974 मज़बूर माइकल डिसूज़ा
1974 कसौटी प्यारेलाल
1973 ज़ंजीर Sher Khan
1973 जुगनू श्याम
1973 जोशीला
1973 बॉबी जैक ब्रैगैन्ज़ा
1973 गद्दार
1972 यह गुलिस्ताँ हमारा
1972 परिचय
1972 विक्टोरिया नम्बर २०३ राना
1972 जंगल में मंगल
1972 रूप तेरा मस्ताना अजीत
1972 एक बेचारा
1972 सज़ा
1972 बेईमान काँस्टेबल राम सिंह
1972 आन बान राजा बहादुर
1971 ज्वाला
1971 नया ज़माना
1971 जवान मोहब्बत विनोद
1970 हमजोली गोपाल राय
1970 गोपी लाला
1970 यादगार मामा जी
1970 जॉनी मेरा नाम मोती
1970 पूरब और पश्चिम
1970 भाई भाई
1969 अंजाना
1969 सच्चाई प्रकाश
1969 भाई बहन रतन
1969 आँसू बन गये फूल
1968 ब्रह्मचारी रवि खन्ना
1968 साधू और शैतान
1968 आदमी
1967 मिलन
1967 उपकार मलंग
1967 एराउन्ड द वर्ल्ड प्राण
1967 पत्थर के सनम लाला भगत राम
1967 राम और श्याम गजेन्द्र
1966 दस लाख
1966 दो बदन अश्विनी राजेन्द्रनाथ
1966 लव इन टोक्यो प्राण
1966 सावन की घटा
1965 खानदान
1965 मेरे सनम श्याम
1965 गुमनाम बैरिस्टर राकेश
1965 शहीद
1964 दूर की आवाज़
1964 राजकुमार
1964 पूजा के फूल बलम सिंह
1963 फिर वही दिल लाया हूँ
1963 मेरे महबूब
1963 दिल ही तो है
1962 हाफ टिकट राजा बाबू
1962 दिल तेरा दीवाना गनपत
1962 झूला
1962 मनमौजी जग्गा
1961 जब प्यार किसी से होता है
1960 जिस देश में गंगा बहती है
1960 छलिया अब्दुल रहमान
1960 माँ बाप सोहन लाल
1960 महलों के ख़्वाब
1959 बेदर्द ज़माना क्या जाने
1959 प्यार की राहें
1958 मधुमती
1958 अमर दीप प्राण
1957 आशा राज
1957 झलक
1957 मिस्टर एक्स
1956 इंस्पेक्टर
1956 चोरी चोरी
1955 आज़ाद सुन्दर
1955 पहली झलक
1955 मुनीम जी
1955 कुंदन
1954 लकीरें
1954 बिरज बहू
1953 आह
1951 बहार शेखर
1951 अफ़साना मोहन
1950 शीश महल
1948 ज़िद्दी

नामांकन और पुरस्कार

फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार

पद्म भूषण

प्राण सिकंद को सन २००१ में भारत सरकार ने कला क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था।

1879: बुल्गारिया में नेशनल गार्ड्स यूनिट की स्थापना हुई थी.

1973: आज ही के दिन अमेरिका के नेशनल पर्सनेल रिकॉर्ड्स सेंटर के ऑफिस में आग लगी थी.

1993: जापान में 7.8 तीव्रता का भूकंप आया था जिसमें 160 लोगों की मौत हो गई थी.

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