अब प्रोटेम स्पीकर के हाथ बीएस येदियुरप्पा सरकार की किस्मत ?

  1. बोपैया को प्रोटेम स्पीकर बनाए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा सकती है कांग्रेस,आर वी देशपांडे और बीजेपी के उमेश कट्टी का नाम भी था प्रोटेम स्पीकर की रेस में,बीजेपी का अपना प्रोटेम स्पीकर होने से वह दल-बदल कानून से निपट सकती है क्योंकि स्पीकर के पास इस कानून से निपटने की शक्तियां होती हैं

    अब प्रोटेम स्पीकर के हाथ बीएस येदियुरप्पा सरकार की किस्मत?

    कर्नाटक मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि कर्नाटक विधानसभा में कैसे शक्ति परीक्षण कराना है इसका फैसला प्रोटेम स्पीकर करेंगे. इससे पहले अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कोर्ट से दरख्वास्त की थी कि सीक्रेट बैलट के तहत सदन में शक्ति परीक्षण कराया जाए.Image result for प्रोटेम स्पीकर के नाम के लिए आरवी देशपांडेदेशपांडे और कट्टी सदन के वरिष्ठ नेता

    बीजेपी विधायक केजी बोपैया बने कर्नाटक के प्रोटेम स्‍पीकर, राज्‍यपाल ने शपथ दिलाई

    बोपैया पिछली बार बीजेपी सरकार में कर्नाटक विधानसभा के स्‍पीकर थे. फि‍लहाल वे विराजपेट सीट से बीजेपी के विधायक हैं.

    नई दिल्‍ली : सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कर्नाटक में फ्लोर टेस्‍ट के लिए बीजेपी विधायक केजी बोपैया को प्रोटेम स्‍पीकर नियुक्‍त किया गया है. इसके लिए राज्‍यपाल वजुभाई वाला ने शुक्रवार को बोपैया को प्रोटेम स्‍पीकर की शपथ दिलाई. बोपैया पिछली बार बीजेपी सरकार में कर्नाटक विधानसभा के स्‍पीकर थे. फि‍लहाल वे विराजपेट सीट से बीजेपी के विधायक हैं.

    दरअसल, कर्नाटक में सियासी ड्रामा शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विधानसभा की तरफ शिफ्ट हो गया. सुप्रीम कोर्ट ने फैसला देते हुए कहा कि कर्नाटक विधानसभा में 19 मई को शाम चार बजे शक्ति परीक्षण होगा. बीजेपी की तरफ से पेश वकीलों ने कहा कि सीक्रेट बैलट पेपर (गुप्‍त मतदान) से यह परीक्षण होना चाहिए, लेकिन कोर्ट ने उनकी दलील को खारिज करते हुए कहा कि 18 मई को शाम चार बजे तक प्रोटेम स्‍पीकर की नियुक्ति की जानी चाहिए. इसी प्रोटेम स्‍पीकर की देखरेख में 19 मई को विधानसभा का शक्ति परीक्षण कराया जाएगा. इसलिए कोर्ट ने किसी पर्यवेक्षक की नियुक्ति नहीं की. ऐसे में सारी निगाहें अब प्रोटेम स्‍पीकर पर टिक गई हैं.

    प्रोटेम(Pro-tem) स्‍पीकर
    प्रोटेम (Pro-tem) लैटिन शब्‍द प्रो टैम्‍पोर (Pro Tempore) का संक्षिप्‍त रूप है. इसका शाब्दिक आशय होता है- ‘कुछ समय के लिए.’ प्रोटेम स्‍पीकर की नियुक्ति गवर्नर करता है और इसकी नियुक्ति आमतौर पर तब तक के लिए होती है जब तक विधानसभा अपना स्‍थायी विधानभा अध्‍यक्ष नहीं चुन लेती. यह नवनिर्वाचित विधायकों का शपथ-ग्रहण कराता है और यह पूरा कार्यक्रम इसी की देखरेख में होता है. सदन में जब तक विधायक शपथ नहीं लेते, तब तक उनको सदन का हिस्‍सा नहीं माना जाता. इसलिए सबसे पहले विधायक को शपथ दिलाई जाती है. जब विधायकों की शपथ हो जाती है तो उसके बाद ये लोग विधानसभा अध्‍यक्ष का चुनाव करते हैं. परंपरा के मुताबिक सदन में सबसे वरिष्‍ठ सदस्‍य को गवर्नर, प्रोटेम स्‍पीकर के लिए चुनते हैं.

    बोपैया को प्रोटेम स्पीकर बनाए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा सकती है कांग्रेस

    वरिष्ठताक्रम की अनदेखी से विवाद 
    राज्यपाल वैजुभाई ने इसके लिए केजी बोपैया नाम के एक ऐसे बीजेपी विधायक को प्रो-टेम स्पीकर बनाया है जो अनुभव और वरिष्ठताक्रम में काफी नीचे हैं. वो केवल चार बार से ही विधायक हैं जबकि नई विधानसभा में कई ऐसे सदस्य भी हैं जो सात या आठ बार से विधायक हैं. खुद बीजेपी में एक सात बार के विधायक उमेश विश्वनाथ खट्टी मौजूद थे. हालांकि नई विधानसभा में सबसे सीनियर सदस्य कांग्रेस आरवी देशपांडे हैं, जिन्होंने प्रो-टेम स्पीकर बनने के लिए अपना दावा पेश किया था. लेकिन राज्यपाल ने उनके दावे को भी किनारे कर दिया. हालांकि बोपैया वर्ष 2009 से 2013 तक कर्नाटक विधानसभा में स्पीकर रह चुके हैं.

    कौन करता है प्रो-टेम स्पीकर की नियुक्ति 
    अब राज्यपाल द्वारा नियुक्त केजी बोपैया ही विधानसभा में सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार बीजेपी की येदुरप्पा सरकार के बहुमत साबित करने की प्रक्रिया को अपनी देखरेख में अंजाम देंगे. प्रो-टेम स्पीकर की नियुक्ति राज्यपाल अल्पकाल के लिए करता है. ये नियुक्ति तब तक प्रभावी रहती है, जब तक कि नई विधानसभा अपना स्थायी स्पीकर नहीं चुन ले. प्रो-टेम स्पीकर को शपथ दिलाने का काम राज्यपाल द्वारा किया जाता है.

    देशपांडे सबसे सीनियर सदस्य 
    कांग्रेस के आरपी देशपांड वर्ष 1983 से विधायक बनते आ रहे हैं. वो पिछली नौ विधानसभाओं में आठ बार चुनकर आए हैं. इसके बाद सदन के दूसरे सबसे वरिष्ठ सदस्य बीजेपी के उमेश विश्वनाथ खट्टी है-जो 1985 से विधानसभा के लिए चुने जाते रहे हैं.
    प्रो-टेम स्पीकर बनाए गए बोपैया पहली बार 2004 में वो बीजेपी के टिकट पर विधायक चुने गए थे. तब से वो लगातार विधानसभा के लिए चुने जाते रहे हैं. 55 साल के बोपैया पेशे से वकील हैं. उन्होंने गोल्ड मेडल के साथ कानून की परीक्षा पास की थी.

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    कर्नाटक विधानसभा

    बोपैया संघ के सदस्य हैं 
    बोपैया बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य रहे हैं. वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सक्रिय सदस्य रहे हैं. आपातकाल में उन्हें गिरफ्तार किया गया था. स्पीकर के रूप में उन्होंने वर्ष 2011 में येदुरप्पा सरकार के खिलाफ विद्रोह करने वाले बीजेपी के 11 विधायकों को अयोग्य करार देकर येदुरप्पा सरकार को नया जीवनदान दिया था. बाद में उनके फैसले को कर्नाटक हाईकोर्ट ने पलट दिया. सुप्रीम कोर्ट ने उनके काम की आलोचना की थी.

    हाइलाइट्स

    • राज्यपाल वजुभाई वाला ने बीजेपी विधायक केजी बोपैया को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया है. बोपैया तीन बार विधायक रह चुके हैं
    • बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कर्नाटक में कल शाम फ्लोर टेस्ट कराए जाने के लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा, “चीफ जस्टिस पर महाभियोग चलाने की मांग करने वाली कांग्रेस पार्टी अब खुश है. ये न्यायपालिका के प्रति कांग्रेस का दोहरा रवैया दिखाता है. इन्होंने न्यायपालिका पर धब्बा लगाने की कोशिश की है.”
    • कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया विशेष विमान से हैदराबाद के लिए रवाना हो गए हैं. बता दें कि हैदराबाद के एक होटल में कांग्रेस और जेडीएस के नेता रुके हुए हैं. आज शाम या कल सुबह ये इन सबको हैदराबाद से बेंगलुरु लाया जाएगा.
    • “100 करोड़ हों या 200 करोड़ हों, हमारे विधायक हमारे साथ हैं. हमारे मेंबर कहीं नहीं जा रहे. आज शाम या कल सुबह हम सभी बेंगलुरु के लिए निकलेंगे.” – जीटी देवगौड़ा, जेडी (एस)
    • येदियुरप्पा के पास खुद को मिलाकर 104 विधायक हैं. उनके द्वारा गवर्नर को दी गई चिट्ठी में 7 दिन का समय मांगा गया और इसमें कोई नाम भी नहीं था. फिर भी गवर्नर ने उन्हें सरकार बनाने के लिए बुलाया. यह असंवैधानिक है. यही नहीं, गवर्नर ने उन्हें 15 दिन का समय दिया.” – सिद्धारमैया
    • “गवर्नर को पक्षपात नहीं करना चाहिए. हम गवर्नर के पास पहले पहुंचे थे.” – सिद्धारमैया
    • “गुलाम नबी आज़ाद हमारी पार्टी का स्टैंड पहले ही क्लियर कर चुके हैं. सुप्रीम कोर्ट का आदेश ऐतिहासिक है और हम इसका स्वागत करते हैं.” – सिद्धारमैया
    • “लोकतंत्र की रक्षा के लिए हम न्यायपालिका को धन्यवाद देते हैं. सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, बीएस येदियुरप्पा कोई भी फैसला नहीं ले सकते और विधायक नियुक्त नहीं कर सकते.” – गुलाम नबी आज़ाद
    • “भारत के इतिहास में किसी भी गवर्नर ने बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय नहीं दिया. फिर येदियुरप्पा को 15 दिन क्यों दिए गए? कर्नाटक के सर्वोच्च पद पर बैठा व्यक्ति कानून के दायरे में काम नहीं कर रहा है.” – गुलाम नबी आज़ाद
    • “बीजेपी सिंगल लार्जेस्ट पार्टी है लेकिन हमारे पास 117 का आंकड़ा है और सरकार बनाने के लिए हम राज्यपाल से भी मिले थे.” – गुलाम नबी आज़ाद
    • “मैं लोकतंत्र की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद देना चाहता हूं. पिछले दो सालों में कुछ राज्यपालों ने कानून के अनुसार काम नहीं किया” – गुलाम नबी आज़ाद
    • सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं.”
    • चीफ सेक्रेटरी से बात करेंगे और कल असेंबली सेशन बुलाएंगे. पूरा विश्वास है कि हम 100% बहुमत साबित करेंगे : फ्लोर टेस्ट करवाए जाने के आदेश पर बोले बीएस येदियुरप्पा
    • सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने संवैधानिक नैतिकता और लोकतंत्र की रक्षा की है. इस फैसले का सम्मान करना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट में लोगों का विश्वास फिर से बढ़ा है- अश्वनी कुमार (कांग्रेस)
    • सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक विधानसभा में कल शाम 4 बजे फ्लोर टेस्ट कराए जाने का आदेश दिया है. प्रोटेम स्पीकर आरवी देशपांडे पूरे टेस्ट पर नज़र रखेंगे.
    • सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक में कल शाम 4 बजे फ्लोर टेस्ट कराए जाने का आदेश दिया है.
    • बीएस येदियुरप्पा ने कल फ्लोर टेस्ट कराए जाने का विरोध किया है. बीजेपी के वकील मुकुल रोहतगी ने पर्याप्त समय मांगा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम और समय नहीं दे सकते.
    • कर्नाटक सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में तुषार मेहता ने कहा कि गवर्नर को कांग्रेस-जेडीएस की तरफ से विधायकों के दस्तखत वाला लेटर कभी नहीं मिला.
    • ताजा जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस और जेडीएस कल फ्लोर टेस्ट कराए जाने के लिए तैयार हैं. हालांकि दोनों पार्टियों ने अपने विधायकों की सुरक्षा की मांग की है.
    • कांग्रेस-जेडीएस के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दोनों पार्टियों की तरफ से कल ही फ्लोर टेस्ट करवाने की बात पर सहमति जताई है. सिंघवी ने कहा, “येदियुरप्पा ने समर्थन का दावा किया है, लेकिन उनके पास समर्थन पत्र नहीं है. वो सिर्फ मौखिक दावे कर रहे हैं.
    • कांग्रेस-जेडीएस के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दोनों पार्टियों की तरफ से कल ही फ्लोर टेस्ट करवाने की बात पर सहमति जताई है. सिंघवी ने कहा, “येदियुरप्पा ने समर्थन का दावा किया है, लेकिन उनके पास समर्थन पत्र नहीं है. वो सिर्फ मौखिक दावे कर रहे हैं.
    • मामले की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की, ‘आखिरकार यह नंबर गेम है और गवर्नर को देखना चाहिए कि किस दल के पास ज्यादा नंबर है.
    • बीजेपी के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि कांग्रेस और जेडीएस के बीच गठबंधन ‘नापाक’ है.
    • गोवा कांग्रेस आज दोपहर गवर्नर से मिलेगी. गोवा कांग्रेस के यतीश नाइक ने बताया, “आज दोपहर गवर्नर से मिलने का समय तय हुआ है. हम उन्हें बताएंगे कि कर्नाटक की तरह उन्हें भी सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते सरकार बनाने का निमंत्रण मिलना चाहिए। हम फ्लोर टेस्ट में बहुमत साबित करेंगे.”
    • बीजेपी की तरफ से वकील मुकुल रोहतगी ने लेटर्स सुप्रीम कोर्ट को सौंप दिए हैं. इन लेटर्स में येदियुरप्पा को सबसे बड़ी पार्टी का नेता चुने जाने का दावा किया है.
    • कर्नाटक सरकार के खिलाफ कांग्रेस-जेडीएस की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बीएस येदियुरप्पा से लेटर्स की मांग की है. मुकुल रोहतगी ने बीजेपी नेता के लेटर्स कोर्ट को सौंप दिए हैं.
    • कर्नाटक गवर्नर द्वारा बीजेपी को सरकार बनाने के आमंत्रण के खिलाफ कांग्रेस-जेडीएस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है.
    • सूत्रों के अनुसार, दो कांग्रेस विधायकों के सिवाय सभी विधायक हैदराबाद पहुंच चुके हैं. सभी 38 जेडीएस विधायक भी हैदराबाद पहुंच चुके हैं. उनके साथ दो निर्दलीय विधायक भी पहुंच चुके हैं. कुल 116 विधायक यहां मौजूद हैं.
    • हम सीएम का लेटर कोर्ट में दिखाएंगे. उन्हें विधायकों को सपोर्ट है और यह सदन में भी साबित करेंगे. हॉर्स ट्रेडिंग जैसी कोई बात नहीं है. यह अलग बात है कि विधायकों को रिजॉर्ट में भेजा जा रहा है – मुकुल रोहतगी, बीजेपी वकील
    • कर्नाटक से कांग्रेस सांसद डीके सुरेश ने बताया, “वे (विधायक) यहां पहुंच रहे हैं. हमने सब व्यवस्था कर ली हैं. उनका इंतज़ार हो रहा है. अगले 2 घंटे में जेडीएस और कांग्रेस दोनों पार्टियों के विधायक यहां पहुंच जाएंगे.”
    • कर्नाटक कांग्रेस की यशोमति ठाकुर ने पार्टी के विधायकों और उनके परिवार वालों को धमकाए जाने का आरोप लगाया है. उन्होंन कहा, “हमारी पुलिस सुरक्षा हटा ली गई है. हमारे विधायकों को धमकाया और डराया जा रहा है. हमारी फ्लाइट्स कैंसिल की जा रही हैं. क्या यह लोकतंत्र है? क्या भारत ऐसा था?”
    • बीएस येदियुरप्पा के शपथ लेने पर कांग्रेस ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात का समय मांगा है. कांग्रेस का आरोप है कि कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला द्वारा बीजेपी को सरकार बनाने के लिए बुलाना ‘असंवैधानिक’ है.

    कर्नाटक गवर्नर द्वारा बीजेपी को सरकार बनाने के आमंत्रण के खिलाफ कांग्रेस-जेडीएस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया है. सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने कल शाम 4 बजे फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दिया है. सीनियर वकील मुकुल रोहतगी ने बीएस येदियुरप्पा द्वारा गवर्नर को दिया गया लेटर सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश किया. इस लेटर में येदियुरप्पा ने विधायकों के समर्थन का दावा किया था. हालांकि, कोर्ट में पेश बीजेपी के लेटर में विधायकों के दस्तखत नहीं थे, जबकि कांग्रेस ने विधायकों के दस्तखत वाला लेटर सौंपा. बता दें कि कर्नाटक में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी बीजेपी के नेता बीएस येदियुरप्पा ने विवादों के बीच गुरुवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. राज्यपाल वजुभाई वाला ने बहुमत वाले कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किया, जिसे लेकर दोनों पार्टियां नाराज़ हैं. कांग्रेस ने राज्यपाल के फैसले को लोकतंत्र की हत्या बताया है. इस बीच खरीद-फरोख्त की आशंकाओं को देखते हुए कांग्रेस और जेडी-एस ने अपने सभी विधायकों को हैदराबाद भेज दिया है.कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि नियम यह है कि पार्टी या जेंडर के आधार पर भेदभाव किए बिना सदन के सबसे वरिष्ठ विधायक को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया जाता है. इस नियम के तहत आरवी देशपांडे को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया जाना था. आरवी देशपांडे आठ बार विधायक बन चुके हैं और उम्मीद थी कि उन्हें ही प्रोटेम स्पीकर बनाया जाएगा. इससे पहले देशपांडे ने कहा था कि इस संबंध में राज्यपाल की तरफ से उनसे कोई संपर्क नहीं किया गया है.

    19 मई को शाम 4 बजे होगा शक्ति परीक्षण
    इस बीच राज्‍यपाल द्वारा बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्‍पा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने के विरोध में कांग्रेस-जेडीएस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. उस पर फैसला देते हुए कोर्ट ने 19 मई को शाम चार बजे कर्नाटक में शक्ति परीक्षण का आदेश दिया है. इससे पहले राज्‍यपाल ने बीजेपी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने के साथ 15 दिनों में बहुमत साबित करने के लिए कहा था.

    हालांकि बीजेपी की तरफ से कहा गया कि वह 19 मई को शक्ति परीक्षण के लिए तैयार नहीं हैं, लिहाजा उसको कुछ और वक्‍त दिया जाना चाहिए लेकिन कोर्ट ने उनकी दलील नहीं सुनी. इसके बरक्‍स कांग्रेस-जदएस गठबंधन की तरफ से पेश अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि वह 19 मई को शक्ति परीक्षण के लिए तैयार हैं.

    कर्नाटक में यह है पूरा गणित 
    कर्नाटक विधानसभा चुनाव की 222 सीटों पर आए नतीजों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी है। बीजेपी को 104 सीटें मिली हैं, लेकिन यह बहुमत से दूर है। बहुमत के लिए 112 विधायक जरूरी हैं और संख्या बल के लिहाज से बीजेपी के 8 विधायक कम हैं। कांग्रेस को 78 और जेडीएस को 37, बसपा को 1 और अन्य को 2 सीटें मिली हैं। शनिवार को शक्ति परीक्षण के बाद ही पता चल सकेगा कि येदियुरप्पा की सरकार रहती है या नहीं।

    क्या कहते हैं जानकार

    संवैधानिक विशेषज्ञ पीडीटी आचरे का मानना है कि अगर प्रोटेम स्पीकर शक्ति परीक्षण करवाते हैं तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर सदन ने नियमित स्पीकर अभी तक नहीं चुना है तो उनकी गैरमौजूदगी में प्रोटेम स्पीकर सदन की कार्रवाई संभाल सकते हैं.

    जानकार मानते हैं कि अगर येदियुरप्पा अपनी पसंद का स्पीकर चुनने में कामयाब हो जाते हैं और बीजेपी विपक्षी पार्टी के विधायकों को तोड़ अपने पाले में शामिल कर लेती है तो उसके लिए कई समस्याएं सुलझ सकती हैं. बीजेपी का अपना प्रोटेम स्पीकर होने से वे दल-बदल कानून से भी निपट सकते हैं क्योंकि स्पीकर के पास इस कानून से निपटने की शक्तियां होती हैं.

    कर्नाटक में एक वाकया और

    कर्नाटक में ऐसा पहले भी हो चुका है. यह केबी कोलीवाड़ के स्पीकर रहते हुए हुआ था. उनके समय राज्य सभा चुनाव के दौरान जेडीएस के सात विधायकों ने कांग्रेस के लिए वोट डाला था लेकिन इसके बावजूद कोलीवाड़ ने उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया था.

    ऐसे मामले आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और उत्तरप्रदेश में भी देखने को मिल चुके हैं. जहां स्पीकर ने फौरन फैसला नहीं लिया और फैसले को अनिश्चित काल के लिए टाल दिया.

    पूर्व में भी ऐसे कई मामले देखने को मिले हैं, जब विधायकों ने विपक्षी पार्टी के पक्ष में वोट डाले और ऐसे वक्त में स्पीकर ने उनके खिलाफ कार्रवाई का फैसला टाल दिया. स्पीकर के लिए जरूरी नहीं होता कि उसे तय समय के अंदर फैसला देना है. वह फैसले को अनिश्चित समय के लिए भी टाल सकता है. प्रोटेम के इस फैसले के चलते पार्टी सरकार बनाने में भी कामयाब हो जाती है.

    प्रोटेम का क्या है अर्थ

    प्रोटेम लैटिन शब्‍द है जो दो अलग-अलग शब्दों प्रो और टेंपोर (Pro Tempore) से बना है. इसका अर्थ है-‘कुछ समय के लिए.’ किसी विधानसभा में  प्रोटेम स्‍पीकर को वहां का राज्यपाल चुनता और इसकी नियुक्ति अस्थाई होती है जब तक विधानसभा अपना स्‍थायी विधानभा अध्‍यक्ष नहीं चुन ले. प्रोटेम स्पीकर नए विधायकों को शपथ दिलाता है और यह पूरा काम इसी की देखरेख में होता है. विधानसभा में जब तक विधायक शपथ नहीं लेते, तब तक उनको सदन का हिस्‍सा नहीं माना जाता.

    बीएस येदुरप्पा के सामने हैं ये 5 विकल्प

    1. बीजेपी के कहने पर अगर कांग्रेस और जेडीएस के विधायक वोटिंग के दौरान सदन में अनुपस्थित रहें या फिर उसके पक्ष में वोट कर दें. कांग्रेस और जेडीएस व्हीप जारी करेगी और तब अगर कोई विधायक अपनी पार्टी के खिलाफ जाकर बीजेपी के पक्ष में वोट करता है तो इससे उनकी सदस्यता जा सकती है.
    2. सदन में वोट गिने जाते हैं, यह नहीं कि व्हिप का उल्लंघन कर कहां वोट दिया. बीजेपी को वोट देने वालों के खिलाफ बाद में कार्रवाई होती रहेगी.
    3. इसके लिए बीजेपी को बहुमत के आंकड़े के पास लाने के लिए कांग्रेस और जेडीए के 15 विधायकों को इस्तीफा दिलवाना होगा. इस हालत में सदन के सदस्यों की कुल संख्या 222 से 208 हो जाएगी और इस आंकड़े पर बीजेपी आसानी से बहुमत पा जाएगी.
    4. कांग्रेस के पास 21 और जेडीएस के 10 लिंगायत विधायक हैं. बीएस येदियुरप्पा भी लिंगायत समुदाय के बड़े नेता हैं. अगर वह लिंगायत के नाम पर इन विधायकों को मनाने में कामयाब हो जाते हैं.
    5. बीजेपी अगर कांग्रेस और जेडीएस के दो तिहाई विधायकों को तोड़ ले जाने में कामयाब हो जाती है तो वह दल-बदल कानून से बच जाएगी. इसके लिए कांग्रेस के 52 और जेडीएस के 26 विधायकों को राजी करना होगा.

विधायकों को फ्लाइट से केरल ले जाना चाहती थी कांग्रेस, ATC ने नहीं दी इजाजत

कांग्रेस विधायकों को तोड़फोड़ से बचाने के लिए कांग्रेस है परेशान कांग्रेस विधायकों को तोड़फोड़ से बचाने के लिए कांग्रेस है परेशान

कर्नाटक में सत्ता हासिल करने के लिए चल रहा सियासी ड्रामा वाकई काफी हैरतअंगेज मोड़ पर पहुंच चुका है. कांग्रेस ने अपने विधायकों के कुनबे को तोड़फोड़ से बचाने के लिए गुरुवार को उन्हें तीन चार्टर्ड फ्लाइट से केरल भेजने की कोशिश की, लेकिन एयर ट्रैफिक कंट्रोलर (ATC) ने इसकी इजाजत ही नहीं दी. आखिरकार देर रात कांग्रेस ने बसों से अपने विधायकों को हैदराबाद भेजा.

बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्पा ने तीसरी बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की गुरुवार को शपथ ली है. राज्यपाल वजुभाई वाला ने सरकार बनाने के लिए सबसे बड़े दल बीजेपी को ही न्योता दिया. पदभार संभालने के कुछ समय बाद ही येदियुरप्पा ने उस ईगलटन रिजॉर्ट की सुरक्षा हटाने के आदेश दिए, जहां कांग्रेस विधायकों को रखा गया था. येदियुरप्पा ने बड़े पैमाने पर शीर्ष अफसरों के ट्रांसफर भी किए.

खबरों के मुताबिक चिकमगलुरु के एसपी को ट्रांसफर कर राम नगर का एसपी बनाया गया. राम नगर क्षेत्र में ही ईगलटन रिजॉर्ट आता है. इससे घबराई कांग्रेस ने तीन चार्टर्ड फ्लाइट से अपने विधायकों को केरल भेजने की कोशिश की, लेकिन बताया जा रहा है कि इसके लिए एटीसी ने इजाजत नहीं दी. इसके बाद देर रात बस से विधायकों को हैदराबाद भेजा गया.

कांग्रेस के कई विधायकों का आरोप है कि उन्हें बीजेपी की तरफ से धमकियां मिल रही है. कांग्रेस नेता रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि ईगलटन रिजॉर्ट से पुलिस सुरक्षा हटाने के बाद बीजेपी कार्यकर्ता वहां पहुंच गए और उन्होंने विधायकों को पैसे देने की पेशकश की. विधायकों का आरोप है कि उन्हें इस तरह के फोन भी आ रहे हैं.

कांग्रेस की सोशल मीडिया प्रमुख दिव्या स्पंदना ने इस बारे में ट्वीट भी किया. उन्होंने लिखा, ‘कर्नाटक कांग्रेस के एक विधायक की पत्नी और बेटी से बात की, यह बात झकझोरने वाली थी कि वह बेटी रो रही थी और उसने अपने पिता की जान पर खतरा बताया. इस तरह की राजनीति से वे इतना असहाय महसूस कर रहे हैं.’

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